तमिलनाडु में 50 बांग्लादेशी नागरिकों पर शिकंजा, पश्चिम बंगाल में भी धरपकड़ तेज़, सीमा पर सुरक्षा एजेंसियाँ हाई अलर्ट पर

Crackdown on 50 Bangladeshi nationals in Tamil Nadu; roundups intensify in West Bengal; security agencies on high alert at the border.

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  • Crackdown on 50 Bangladeshi nationals in Tamil Nadu; roundups intensify in West Bengal; security agencies on high alert at the border.

नई दिल्ली। फर्जी दस्तावेज़ों और अवैध पहचान के सहारे भारत में रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ देशभर में कार्रवाई तेज़ कर दी गई है। केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर ऐसे लोगों की पहचान कर रही हैं और उनके खिलाफ सख्त कदम उठा रही हैं। तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और दिल्ली सहित कई राज्यों में चल रहे अभियानों से यह स्पष्ट संदेश दिया जा रहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून व्यवस्था और वैध नागरिक व्यवस्था से समझौता नहीं किया जाएगा। अवैध रूप से भारत में रहने वालों के खिलाफ अब कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है और किसी भी प्रकार की ढील देने के संकेत नहीं हैं।

बता दें कि ताजा घटनाक्रम में तमिलनाडु पुलिस ने 50 बांग्लादेशी नागरिकों को निर्वासित करने की प्रक्रिया शुरू करते हुए उन्हें पश्चिम बंगाल भेजा है, जहां से उन्हें बांग्लादेशी अधिकारियों को सौंपा जाएगा। इनमें 44 पुरुष और 6 महिलाएं शामिल हैं। ये सभी सेलम जिले के अत्तूर तालुक कार्यालय परिसर में बने विशेष निरुद्ध शिविर में रखे गए थे। आधिकारिक आदेश मिलने के बाद तीन वाहनों के जरिए इन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच तिरुचिरापल्ली पहुंचाया गया। वहां से इन्हें हावड़ा एक्सप्रेस के विशेष डिब्बे में पश्चिम बंगाल रवाना किया गया। पूरे अभियान की निगरानी सेलम सशस्त्र रिजर्व के उप पुलिस अधीक्षक शक्तिवेल के नेतृत्व में 40 सदस्यीय सशस्त्र पुलिस दल ने की।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार पश्चिम बंगाल के हरिदासपुर भू-सीमा पर इन घुसपैठियों को सीमा सुरक्षा बल के हवाले किया जाएगा, जिसके बाद उन्हें बांग्लादेश भेजने की अंतिम प्रक्रिया पूरी होगी। यह कार्रवाई उन सभी अवैध घुसपैठियों के लिए कड़ा संदेश है जो वर्षों से भारत की उदार व्यवस्था का दुरुपयोग करते रहे है।

चौंकाने वाली बात यह है कि अत्तूर के विशेष शिविर में अभी भी 130 से अधिक विदेशी नागरिक मौजूद हैं, जिनके मामले लंबित हैं या जो जमानत पर हैं। इससे साफ है कि देश के विभिन्न हिस्सों में अवैध तरीके से रह रहे विदेशी नागरिकों का जाल कितना गहरा हो चुका है। देखा जाये तो सुरक्षा एजेंसियों के सामने अब केवल घुसपैठियों को पकड़ना ही चुनौती नहीं है, बल्कि उन नेटवर्कों को भी ध्वस्त करना जरूरी हो गया है जो इन्हें आश्रय, नौकरी और फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराते हैं।

इसी कड़ी में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में भी बड़ी कार्रवाई हुई। भगवानगोला रेलवे स्टेशन परिसर से नौ बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ संदिग्ध लोग स्टेशन के आसपास घूम रहे हैं। इसके बाद भगवानगोला थाने की टीम ने छापा मारकर पूछताछ की, जिसमें सभी की पहचान बांग्लादेशी नागरिकों के रूप में हुई।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ये लोग भारत के अलग अलग हिस्सों में काम कर रहे थे और गुपचुप तरीके से वापस बांग्लादेश भागने की तैयारी में थे। पुलिस को आशंका है कि गिरफ्तारी के डर से ये देश छोड़ने की फिराक में थे। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि ये लोग भारत में कैसे दाखिल हुए, किसने इन्हें पनाह दी, कहां रोजगार मिला और इनके पीछे कौन-सा अवैध गिरोह सक्रिय है। मानव तस्करी और अवैध घुसपैठ के अंतरराज्यीय नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।

बतादे की देशभर में चल रही इन कार्रवाइयों के पीछे केंद्र सरकार की स्पष्ट नीति दिखाई दे रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सीमा सुरक्षा बल और बांग्लादेश सीमा रक्षकों के साथ समन्वित व्यवस्था लागू करते हुए अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान और वापसी की प्रक्रिया तेज कर दी है। दिल्ली पुलिस और विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय भी लगातार ऐसे लोगों की पहचान कर रहे हैं जो वीजा नियमों का उल्लंघन कर भारत में रह रहे हैं। दिल्ली में भी हाल के दिनों में 66 लोगों को हिरासत में लिया गया है।

वहीं पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा चलाया जा रहा “पहचान करो, नाम हटाओ और निर्वासित करो” अभियान इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह अभियान केवल अवैध नागरिकों की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी योजनाओं और मतदाता सूची में घुसपैठ करने वालों पर भी नजर रखे हुए है।

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